युवाओं में सबसे ज्यादा देखने को मिल रही हैं ये 5 हार्ट डीसीज, सब पर ध्यान देना है जरूरी

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दिल की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रहती। बदलती जीवनशैली, तनाव, जंक फूड और शारीरिक निष्क्रियता के कारण युवा वर्ग में भी हृदय रोग तेजी से बढ़ता दिखता है। वैश्विक स्तर पर हृदय रोग मृत्यु का प्रमुख कारण बना रहता है और कम उम्र में इसके मामले बढ़ना चिंता की बात बनता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में चर्बी जमने की प्रक्रिया बचपन से ही शुरू हो सकती है और धीरे धीरे गंभीर रूप लेती है।

यहां उन 5 हार्ट डिजीज पर नजर डालना जरूरी बनता है जो युवाओं में सबसे ज्यादा देखी जाती हैं।

1. कोरोनरी आर्टरी डिजीज

कोरोनरी आर्टरी डिजीज में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियां संकरी हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण एथेरोस्क्लेरोसिस बनता है। धमनियों की अंदरूनी परत पर फैटी डिपॉजिट जमा होता है और रक्त प्रवाह कम होता है।

युवाओं में धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर इसका खतरा बढ़ाते हैं। छाती में दबाव जैसा दर्द, सांस फूलना, थकान और कभी कभी अचानक हार्ट अटैक इसके लक्षण बनते हैं। कई बार कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता और पहला संकेत हार्ट अटैक बनता है। इसलिए समय रहते लिपिड प्रोफाइल और ब्लड प्रेशर की जांच अहम बनती है।

2. हार्ट अटैक

हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की किसी धमनी में ब्लॉकेज पूरी तरह बन जाता है और हृदय की मांसपेशी को रक्त नहीं मिलता। युवा अक्सर इसे नजरअंदाज करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बीमारी उम्रदराज लोगों की होती है।

सीने के बीच में दर्द, बाएं हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैलने वाला दर्द, पसीना आना, चक्कर आना या उल्टी जैसा महसूस होना इसके संकेत बनते हैं। महिलाओं में कई बार सांस की तकलीफ और मतली प्रमुख लक्षण बनते हैं। जीवनशैली में सुधार और जोखिम कारकों पर नियंत्रण सबसे बड़ी रोकथाम बनती है।

3. स्ट्रोक

स्ट्रोक को आमतौर पर दिमाग की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह भी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ा रोग बनता है। जब मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति रुकती है या रक्तस्राव होता है तब स्ट्रोक होता है।

चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत, चक्कर आना या अचानक तेज सिरदर्द इसके लक्षण बनते हैं। युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, मोटापा और अनियंत्रित डायबिटीज इसका जोखिम बढ़ाते हैं। कई मामलों में दिल की अनियमित धड़कन भी कारण बनती है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी विकलांगता का खतरा बढ़ता है।

4. पेरिफेरल आर्टरी डिजीज

पेरिफेरल आर्टरी डिजीज में हाथ या पैरों की धमनियां संकरी हो जाती हैं। चलने पर पिंडलियों में दर्द या ऐंठन महसूस होना इसका आम लक्षण बनता है, जो आराम करने पर कम होता है।

युवाओं में यह समस्या कम दिखती थी, लेकिन अब धूम्रपान और मेटाबोलिक सिंड्रोम के कारण इसके मामले बढ़ते हैं। त्वचा का रंग बदलना, घाव का देर से भरना और पैरों में ठंडापन भी संकेत बनते हैं। यह बीमारी भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ाती है।

5. हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी हृदय बीमारी

हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है तो यह हृदय की मांसपेशियों को मोटा करता है और हार्ट फेल्योर का कारण बनता है। युवा अक्सर इसे साइलेंट किलर मानते हुए भी गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि शुरुआती चरण में लक्षण नहीं दिखते।

अनियंत्रित ब्लड प्रेशर से हृदय पर दबाव बढ़ता है और धीरे धीरे उसकी पंपिंग क्षमता प्रभावित होती है। नियमित जांच, नमक का सीमित सेवन, व्यायाम और तनाव नियंत्रण इस खतरे को कम करते हैं।

क्यों बढ़ रहा है जोखिम

बैठे रहने वाली जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड, धूम्रपान, शराब का सेवन और मानसिक तनाव युवाओं में हृदय रोग का प्रमुख कारण बनते हैं। वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि हृदय रोग से होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होता है।

अच्छी बात यह रहती है कि अधिकांश हृदय रोग रोके जा सकते हैं। धूम्रपान से दूरी, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, वजन नियंत्रण और नियमित स्वास्थ्य जांच जोखिम को काफी हद तक घटाते हैं।

युवावस्था ऊर्जा का समय बनता है, लेकिन यही समय भविष्य की सेहत की नींव भी रखता है। दिल को मजबूत रखना किसी एक दिन का काम नहीं बनता, बल्कि रोज की आदतों का परिणाम बनता है। दिल चुपचाप काम करता है, लेकिन जब वह संकेत देता है तो उसे अनदेखा करना महंगा साबित होता है।